नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये । आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम । नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Saturday, October 3, 2026

सुर नर मुनि तेरे गुणगान करते शिव अज हरि भगवान

 

हनुमानजी के प्रेम और भक्ति की सराहना देवता, मनुष्य, मुनि, शंकरजी, व्रह्माजी, विष्णुजी और स्वयं भगवान श्रीराम भी करते हैं ।

 

 शंकरजी, व्रह्माजी, विष्णुजी और स्वयं भगवान श्रीराम हनुमान जी के चरित सुनते हैं ।धन्य हैं हनुमानजी । हनुमानजी की कीर्ति सभी लोकों में छाई हुई है । हनुमानजी के प्रेम, भक्ति और यश-कीर्ति का गायन शेष, महेश भी नहीं कर सकते-


धन-धन्य कीरति जग छाई ।

शेष महेश सकहिं नहिं गाई ।।

 

।। जय श्रीहनुमानजी ।।

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