जिस प्रकार रामजी विद्यानिधि हैं। अर्थात रामजी को कुछ सीखने की या पढ़ने की जरूरत नहीं होती फिर भी लीला की दृष्टि से पढ़ते और सीखते हैं। इसी प्रकार सीता जी को भी कुछ पढ़ने या सीखने की जरूरत नहीं होती।
जैसे भगवान श्रीराम धनुर्विद्या में निपुण हैं। धनुर्वेद के सभी रहस्यों के ज्ञाता हैं। ठीक ऐसे ही सीताजी भी धनुर्विद्या में निपुण हैं।
भगवान श्रीराम ने स्वयं सीताजी को धनुर्विद्या सिखाया है।
।। जय श्रीसीताराम ।।
No comments:
Post a Comment
इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी दें