नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।
Showing posts with label रामजी. Show all posts
Showing posts with label रामजी. Show all posts

Sunday, August 2, 2026

सीता शक्ति रूप बल भारी मूलकासुर आदिक संघारी

 

सामान्यतया लोग सोचते हैं कि सीता जी का रावण हरण कर ले गया । और वे रक्षा और सहायता के लिए पुकारती रहीं । स्वयं अपनी रक्षा नहीं किया या नहीं कर सकी । इसका मतलब सीताजी साधारण स्त्री हैं । लेकिन ऐसा सोचना, समझना, मानना या कहना बिल्कुल गलत है ।


  सीताजी आदि शक्ति है । इस संसार की मूलाधार शक्ति हैं । सीताजी में बहुत बल है और सीताजी ने भी कई राक्षसों का वध किया है-


सीता शक्ति रूप बल भारी 

मूलकासुर आदिक संघारी ।।

 

 

 

 

Tuesday, February 10, 2026

जे राम-रँगीले

 

जो राम रँगीले हैं अर्थात  जो लोग राम जी के रंग में रँगे हुए हैं उनका तीनों कालों में अर्थात, भूत, वर्तमान और भविश्य में भला ही होता है । इसलिए हम सबको भी राम जी के रंग में रँग जाना चाहिए 

   समस्या तो तब आती है जब रँगे तो संसार के रंग में होते हैं और दिखाया जाता है कि हम राम के रंग में रँगे हुए हैं । अथवा आधा-अधूरा या केवल कुछ अंश में ही रँगे होते हैं । चलो हम लोग रामजी से और हनुमानजी से प्रार्थना करें कि हमारा मन भी रामजी के रंग में रँग जाए-


रंगों रे मन ! राम रघुवर के रंग ।

जग से नेह लगावत मूरख, कछु नहिं जावत संग ।।१।।

सुख जल खोजत कतहुँ न पावत, दौड़त सरिस कुरंग ।

दिन-दिन घटत आयू बल तन को, जोहत काल भुजंग ।।२।।

मनुज शरीर लहे का पामर, जो नहिं बदले ढ़ंग ।

राम भजे अरु राम गुन गाए, परिहरि कुमति कुसंग ।।३।।

साधु संत रघुनाथ कथा बिनु, बाढ़त तृष्ना तरंग ।

जनम जनम की काई भीतर, धुलत धुलै सत्संग ।।४।।

सुंदर श्याम सुशील सियावर, लाजत देखि अनंग ।

कर सर चाप धरे रघुनंदन, काँधे लसत निषंग ।।५।।

सुमिरत राम सखा करि राखत, प्रीति करत नहिं भंग ।

दीन संतोष दीन जन राखत, बानर-भालु भी संग ।।६।।

 

          ।। जय श्रीसीताराम ।।

Friday, January 9, 2026

हनुमान सम नहिं बड़भागी | नहिं कोउ राम चरन अनुरागी

 

भगवान शंकरजी पार्वतीजी से कहते हैं कि हनुमानजी के समान बड़ा भाग्यशाली दूसरा कोई नहीं है  और न ही कोई हनुमानजी के समान राम जी के चरणों में प्रेम करने वाला है ।

 

  हे गिरिजा ! जिनकी अर्थात हनुमानजी की  प्रीति और सेवा का वर्णन बार-बार स्वयं प्रभु राम ने किया है । उनके समान दूसरा कौन होगा ?

 

  इस प्रकार बड़ा भाग्यशाली होने में और राम चरण अनुरागी होने में हनुमानजी महाराज अद्वितीय है ।

 

  ।। जय श्रीहनुमानजी ।।

Wednesday, November 12, 2025

रामजी को अपना बना के तो देखो

 श्री रामजी जैसा स्वामी पाकर गोस्वामी जी बार-बार बलिहार जाते हैं । और कहते हैं कि रामजी को अपना स्वामी बना कर देखो । 

संसार में स्वामी की कमी नहीं है लेकिन श्रीराम जी जैसा स्वामी जो गुण ग्राही हो, अवगुण को दूर करने वाला हो, थोड़े में बहुत समझने वाला हो, कभी भी क्रोध न करने वाला हो, बहुत ही सरल हो, सबल हो, समर्थ हो, दीन-दुखियों से प्रेम करने वाला हो, जिसका कोई न सुनता हो उसका भी सुनने वाला हो, जिसे कोई भी न देखता हो उसे भी देखने वाला हो, सेवक से असीम स्नेह रखने वाला हो, एकबार अपनाकर कभी भी न छोड़ने वाला हो, माता-पिता की तरह सार-सँभार करने वाला हो; ऐसा कोई नहीं है ।


इसलिए एकबार रामजी को अपना बना के तो देखो 



। जय श्रीराम 

Sunday, October 12, 2025

रावण अशोक वाटिका में क्यों आया था

 ग्रंथों में ऐसा भी वर्णन मिलता है कि रावण को भी स्वप्न से यह पता चल गया था कि हनुमानजी अशोक वाटिका में आ गए हैं इसलिए ही रावण सीताजी को डराने-धमकाने आया था |


इसलिए रावण ने सीताजी से अशोभनीय बातें किया और उन्हें तलवार लेकर मारने दौड़ा और पिचासनियों को सीताजी को परेशान  करने के लिए बोल कर गया जिससे हनुमानजी जाकर रामजी से ये सब बताएं और रामजी जल्दी आकर उसका वध कर दें 

 

। जय श्रीराम 

Tuesday, July 8, 2025

भगवान का चतुर्व्यूह अवतार

 भगवान के कई अवतार हुए हैं | लेकिन केवल दो अवतार ही हैं जो चतुर्व्यूह अवतार हैं | पहला रामावतार और दूसरा कृष्णावतार | 


यही कारण है कि सनातन हिंदू धर्म में रामजी और कृष्णजी अधिक पूजे जाते हैं | इनका यशोगान अधिक होता है |

जब भगवान चार रूपों में अवतार लेते हैं तो  वह अवतार चतुर्व्यूह अवतार कहा जाता है |


रामावतार  में  रामजी, भरतजी, लक्ष्मण जी और शत्रुघ्नजी का एक चतुर्व्यूह था | और कृष्णावतार में कृष्णजी, बलरामजी, प्रद्युम्नजी और अनिरुद्ध जी को मिलाकर चतुर्व्यूह पूरा हुआ था |


 दोनों में यह अंतर था कि रामावतार में चार रूपों में भगवान लगभग एक साथ अवतरित हुए थे | जबकि कृष्णावतार में पहले बलराम जी फिर कृष्ण जी, फिर प्रद्युम्नजी कृष्ण जी के पुत्र के रूप में और अनिरुद्ध जी प्रद्युम्नजी के पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे |


|| जय श्रीराम ||

Friday, April 18, 2025

हनुमानजी में बोलो बल कितना

 

हनुमानजी में बोलो बल कितना ।

कोई माप नहीं, है बल इतना ।।

दस सहस गज में बल जितना ।

एक दिग्गज में होता बल उतना ।।

दस सहस दिग्गज में बल जितना ।

एक एरावत में होता बल उतना ।।

दस सहस एरावत में बल जितना ।

एक इंद्र में होता है बल उतना ।।

दस सहस इंद्र में बल जितना ।

कनिष्ठा अगुंली में ही है बल इतना ।।

कोई कैसे कहेगा बल कितना 

हनुमान जी में अतुलित बल जितना 

 

 

।। महावीर हनुमान जी की जय ।।

Saturday, February 1, 2025

श्रीराम गीता अनमोल वचन - सबकी उत्पप्ति, पालन-पोषण मुझसे ही होता है और सबका मुझमें ही प्रलय हो जाता है

 

जो मोहरूपी कलिल का नाश करके सदा परमात्म पद का साक्षात्कार कराती है, वह व्रह्मविद्या भी मुझ महेश्वर की आज्ञा के ही अधीन है । इस बिषय में बहुत कहने से क्या लाभ यह सारा जगत मेरी शक्ति से ही उत्पन्न हुआ है, मुझसे ही इस विश्व का भरण-पोषण होता है तथा अंततोगत्वा सबका मुझमें ही प्रलय होता है-


बहुनात्र किमुक्तेन मम शक्त्यात्मकंजगत ।।

मयैव पूर्यते विश्वं मय्येव प्रलयं ब्रजेत् ।।



।। जय श्रीराम ।।

Sunday, September 1, 2024

श्रीराम गीता के अनमोल वचन -तीन

 जो मूढ़ मेरे भक्त की निंदा करता है, वह मुझ देवाधि भगवान की ही निंदा में रत है । जो भक्तिभाव से भक्त का पूजन करता है, वह सदा मेरी ही पूजा में लगा हुआ है ।


 यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि रामजी हनुमानजी से कहते -


जो मेरी आराधना के निमित्त से मुझे पत्र-पुष्प, फल और जल अर्पित करता है तथा मन और इन्द्रियों को काबू में रखता है, वह मेरा भक्त माना गया है ।


। जय श्रीराम ।।

Thursday, August 1, 2024

श्रीराम गीता के अनमोल वचन- दो

 

जो भक्तजन मेरी उपासना करते हैं, उनके निकट मैं नित्य निवास करता हूँ

‘तेषां संनिहितो नित्यं ये भक्ता मामुपासते’ ।

 

यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि थोड़ी-बहुत पूजा-उपासना तो बहुत से लोग करते हैं और करना भी चाहिये । लेकिन जिस भक्त के निकट भगवान नित्य निवास करते हैं वे कौन से भक्त हैं ? 


रामजी हनुमान जी से कहते हैं-


जो मेरी आराधना के निमित्त से मुझे पत्र-पुष्प, फल और जल अर्पित करता है तथा मन और इन्द्रियों को काबू में रखता है, वह मेरा भक्त माना गया है ।


। जय श्रीराम 

 

लोकप्रिय पोस्ट