नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Thursday, November 5, 2020

राघव मोरे दीन हितैषी

 राघव मोरे दीन हितैषी ।


जेहि दीनन कोई बात न पूछै जग करै ऐसी तैसी ।। १ ।।


तेहि दीनन गहि बाँह निवाजत कुशल निभै कहौ कैसी ।


देत-दिवावत मान सुधारत बिगरी हो चाहे जैसी ।। २ ।।


पलक नयन जिमि दास को राखत मेटत सकल अनैसी ।


दीन संतोष निज धाम बसावत रीति कहीं नहीं ऐसी ।। ३ ।।

 


।। दीन हितैषी भगवान राम की जय ।।

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