दीनन के दुख हारी, हमार सुधि लीजै खरारी ।
साधु संत सदग्रंथ बतावत, दीन मलीन राम को भावत ।
डूबत लेहिं उबारी । हमार सुधि. ।।
दीन मलीन को राम बसावत, बिगड़ी जनम की नाथ बनावत । सुर मुनि कहत पुकारी । हमार सुधि. ।।
नीच निषाद को कंठ लगाए, केवट से पद कंज धुलाए ।
शवरी अहिल्या तारी । हमार सुधि. ।।
कोल किरात भील अपनाए, वानर भालू सखा बनाए ।
गीध को दिहेउ उधारी । हमार सुधि. ।।
जो जन और ठौर नहिं पाए, आए सुनि गुन विरद बुलाए । राखेउ सब दुख टारी । हमार सुधि. ।।
दीन संतोष नहीं मुख मोरेउ, दीन मलीन ओर निज हेरेउ । रघुवर विरद संभारी । हमार सुधि. ।।
।। खरारी भगवान श्रीराम की जय ।।