श्रीराम लला की आरती की चोरी क्या है ? आरती कैसे चोरी हुई ? आरती कहाँ से चोरी हुई ? यह पूरा प्रकरण क्या है ? इसमें कौन कौन से लोग शामिल हैं ?
जाने अनजाने इसमें कई मीडिया वाले और अनेक धार्मिक/ अध्यात्मिक बेबसाइट चलाने वाले लोग हैं जिसमें वेबसाइट के माध्यम से कुछ चीजों का बिक्री करने वाले या कोई धार्मिक कृत कर-कराकर लोगों से पैसा कमाने वाले लोग हो सकते हैं ।
श्रीराम लला की आरती- ‘आरती कीजै श्रीराम लला की । पूण निपुण धनुवेद कला की’ इस ब्लॉग से चुरा ली गई जो मार्च २०१५ में प्रकाशित की गई थी । मूल आरती का लिंक निम्नलिखित है ।
http://sriramprabhukripa.blogspot.com/2015/03/blog-post_7.html
इस आरती की रचना श्रीराम चालीसा के साथ २०१०-२०११ में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूंसी नामक स्थान पर की गई थी और श्रीराम चालीसा के साथ ही एक ब्लॉग पोस्ट के रूप में इस ब्लॉग पर २०१५ में प्रकाशित कर दी गई थी ।
आस्थासंग्रह और आरती संग्रह नामक दो वेबसाइटों ने आरती को प्राचीन और रचनाकार को अज्ञात बता दिया । ऐसा लिखा गया कि यह ऐतिहासिक रचना सदियों से चली आ रही है । इस तरह का भ्रम इन वेबसाइटों के माध्यम से फैलाया गया ।
आरतीचालीसा जैसी बेबसाईट पर बिना खोज बीन के ही आरती को प्रकाशित कर लिया गया । एक से दूसरे और दूसरे से तीसरे लोग इसमें शामिल होते गए । कॉपी-पेस्ट का ऐसा सिलसिला चला कि चलता ही गया ।
देश के विभिन्न न्यूज चैनेल भी इस कॉपी पेस्ट में शामिल हो गए । जिसमें आजतक, जनसत्ता, न्यूज़नेसन टीवी, एनडीटीवी, प्रभातखबर, टाइम्सनाऊ हिंदी, एशियानेट न्यूज, न्यूज १८ आदि ने भाग लिया । किसी ने कोई फैक्ट चेक नहीं किया । बस फटाफट कॉपी-पेस्ट किया ।
कई कम्पनियां आरती का पोस्टर बनाकर बेचने लगीं । जिसमें प्रिंटमैन इंडिया और अनन्या क्रेयसन आदि शामिल हैं ।
इस मुहीम में संस्कार टीवी और आगे निकल गई । इसने यूट्यूब, फेसबुक और अपनी वेबसाइट पर आरती का वीडियो बनाकर साधु-संतों की आरती करते हुए फोटो के साथ और अलग-अलग गायकों से गवाकर आरती को प्रसारित कर दिया और आरती की लिरिक्स को पारंपरिक बता दिया । लिख दिया ।
ऐसे ही अन्य लोगों ने गाकर यूट्यूब आदि पर वीडियो को अपलोड कर दिया । और कई अन्य लोगों ने अपने-अपने तरह से कॉपी-पेस्ट कर लिया ।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक गलती उनकी है जिन्होंने लिरिक्स को पारंपरिक लिखा । जिन्होंने आरती को प्राचीन और रचनाकार को अज्ञात लिख दिया । और बिना किसी जानकारी के आरती के बारे में भ्रम फैला दिया ।
श्रीराम लला की एक आरती चोरी हो गई । इसका क्या मतलब है ? यह आरती ब्लॉग से चुरा ली गई है । अर्थात बिना ब्लॉग का संदर्भ और रचनाकार का नाम दिए लोगों ने इसे अपनी-अपनी वेबसाइटों पर कॉपी-पेस्ट कर लिया है । और कुछ लोगों ने ऐसा भ्रम पैदा कर दिया है कि यह रचना प्राचीन है जो सदियों से चली आ रही है और इसके रचनाकार के बारे में कोई जानकारी नहीं है । यही सब गलत है । गलती यही है ।
अब आरतीसंग्रह और आस्थासंग्रह से आरती के पृष्ठ को या तो हटा दिया गया है या उसी यूआरएल पर दूसरी आरती या किसी अन्य चीज के बारे में पोस्ट कर दिया गया है । आरती को अपने वेबसाइट से वेबदुनिया, शुभपूजा आदि ने भी हटा दिया है । भूल सुधारने के बजाय आरती को वेबसाइट से हटा दिया। जबकि मेरा उद्देश्य किसी वेवसाइट से आरती को हटवाना नहीं है । केवल सही जानकारी सब तक पहुँचनी चाहिए ।
आरती के प्रचार-प्रसार में भी बुराई नहीं है । अधिक से अधिक लोगों तक आरती पहुँचे तो इसमें क्या समस्या है ? लेकिन रचनाकार को अज्ञात न बताया जाता । लिरिक्स को पारंपरिक न घोषित कर दिया जाता । बिना रचनाकार का नाम दिए पोस्ट न कर लिया जाता । भ्रम न फैलाया जाता । झूठी जानकरी न दी जाती । बस इन बातों का ध्यान रख लिया जाता । तो कोई समस्या नहीं थी ।
कुल मिलाकर आरती रामजी की है । राम लला की है । जो गाने के लिए है । पढ़ने के लिए है और रामजी से जुड़ने के लिए है । घर-घर में गाने के लिए है । मंदिर में गाने के लिए है । कथा सत्संग में गाने के लिए है । बस रचनाकार का नाम छुपाकर कॉपी-पेस्ट नहीं करना चाहिए । और लिरिक्स को पारंपरिक नहीं लिखना चाहिए ।
।। जय श्रीराम ।।