नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Sunday, July 5, 2026

रामजी अपकार नहीं उपकार याद रखते हैं

 

रामजी के प्रति कोई अपकार  कर दे तो राम जी उसे याद नहीं रखते । भूल जाते हैं । लेकिन कोई थोड़ा भी उपकार कर दे तो उसे कभी नहीं भूलते । उपकार को याद रखते हैं । कोई रामजी से शत्रुता करे तो रामजी उसके किए को भी याद नहीं रखते 

 

क्योंकि रामजी को इन सब चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता  लेकिन उपकार से फर्क पड़ता है-


सुनु कपि तुम समान उपकारी ।

नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी ।

प्रति उपकार करौं का तोरा ।

सनमुख होइ न सकत मन मोरा ।

सुनु सुत तोहि उरिन मैं नहीं ।

देखेउँ करि बिचार मन माहीं ।

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