नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Saturday, December 16, 2023

कथा-प्रवचन और कीर्तन में उपेक्षित पद और चौपाई

 

जहाँ एक ओर कथा-प्रवचन और कीर्तन के दौरान कुछ पद और चौपाई पर विशेष जोर दिया जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ की बिल्कुल उपेक्षा कर दी जाती है । उदाहरण के लिए जिनका बहुतायत गायन होता है और जिनको कीर्तन में भी सम्मिलित किया जाता है उनमें से कुछ चौपाई और पद निम्नवत हैं - (१) ‘अब मोहिं भा भरोस हनुमंता । बिनु हरि कृपा मिलहिं नहिं संता’ ।। (२) ‘प्रथम भगति संतन कर संगा’ । (३) ‘जब द्रवहिं दीनदयाल राघव साधु संगति पाइए’ । 


  कई कथा वाचक और संत उपरोक्त चौपाई व पद पर बहुत जोर देते हैं और जोर देकर समझाते भी हैं जिससे सुनने वालों को समझ में आ जाए कि उन पर भगवान की कृपा हो चुकी है तभी ये हम लोगों को मिले हैं और कथा सुना रहे हैं । इसका प्रभाव यह होता है कि कई भोले-भाले लोग कथा वाचक का संग करने लगते हैं अर्थात उनके साथ लग जाते है । अथवा साथ के लिए लालायित रहते हैं या रहने लगते हैं ।


   लेकिन कुछ पद और चौपाई ऐसी हैं जिनकी प्रायः उपेक्षा कर दी जाती है । इनकी ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता ।  इनमें से कुछ निम्नवत हैं- (१) ‘संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही । चितवहिं राम कृपा करि जेही’ ।। (२) ‘भव सरिता को नाव सुद्ध संतन के चरण’

 

 इस प्रकार कथा-प्रवचन और कीर्तन में लोग भले ही उपेक्षा कर दें लेकिन शुद्धता का बहुत महत्व है । कोई समझे अथवा न समझे, माने अथवा न माने लेकिन जिन चौपाईयों और पदों पर विशेष जोर दिया जाता है उनमे भी संत का मतलब विशुद्ध संत ही है । क्योंकि विशुद्ध संतों से ही लोक और परलोक  बन सकता है 

 

 

 । जय श्रीसीताराम 

 

Friday, December 1, 2023

पीछे-पीछे भगवान लगा दूँ

 

आजकल कई लोग कथा सत्संग में ऐसा बोलते हैं, बताते हैं कि लगता है कि इनकी सेवा करो, इनकी कथा सुनों, इनका संग करो तो ये सारे काम बना देंगे अथवा बन जाएगा ।

ये आसानी से भगवान की लीला में प्रवेश करा देंगे अथवा आसानी से लीला में प्रवेश हो जाएगा । ये आसानी से भगवद प्राप्ति करा देंगे अथवा आसानी से भगवद प्राप्ति हो जायेगी ।

 

 इतना ही नहीं रही भगवान के दर्शन की बात तो यह बहुत मामूली बात है । क्योंकि ये भगवान को पीछे-पीछे लगा देंगे अथवा भगवान स्वयं पीछे-पीछे लग जायेंगे । बस करना क्या है-इनकी सेवा करो, इनकी कथा सुनों, इनका संग करो ।

 

तेरा मैं हर काम करा दूँ ।

लीला में प्रवेश करा दूँ ।।

पल में भगवद प्राप्ति करा दूँ ।

दर्शन की तो बात ही क्या है

पीछे-पीछे भगवान लगा दूँ ।।

 

।। जय श्रीराम ।।

लोकप्रिय पोस्ट