नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Saturday, October 18, 2025

बुढ़ापे में आशांति-दुख से कैसे बचे

 जब जीव यह मान लेता हैं कि यह मेरा है, मैंने किया है तो इससे समस्या आती है  । मैं और मेरे की यह भावना बंधकारी है । मन के अशांति का कारण बनती है । 

कई लोग बुढ़ापे में यह सोचकर परेशान रहते हैं कि मेरा अब कुछ रह ही नहीं गया । सब बेटे और बहू का या पोते का हो गया । इससे अशांति में जीते हैं 


   जब अपना मानकर नहीं रहा जाएगा तो यह समस्या, अधिकार की समस्या, अधिकार जाने की समस्या हावी नहीं होगी । तो इससे जनित अशांति, दुःख आदि भी नहीं होगें । 


।। जय श्रीराम ।।

Sunday, October 12, 2025

रावण अशोक वाटिका में क्यों आया था

 ग्रंथों में ऐसा भी वर्णन मिलता है कि रावण को भी स्वप्न से यह पता चल गया था कि हनुमानजी अशोक वाटिका में आ गए हैं इसलिए ही रावण सीताजी को डराने-धमकाने आया था |


इसलिए रावण ने सीताजी से अशोभनीय बातें किया और उन्हें तलवार लेकर मारने दौड़ा और पिचासनियों को सीताजी को परेशान  करने के लिए बोल कर गया जिससे हनुमानजी जाकर रामजी से ये सब बताएं और रामजी जल्दी आकर उसका वध कर दें 

 

। जय श्रीराम 

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