जो सदा अर्थात तीनों कालों में और सर्वत्र सत्य रहता है । वह ही शाश्वत कहलाता है । वही सनातन कहलाता है । और सनातन धर्म के अनुसार परमात्मा सत्य, शास्वत और सनातन है ।
नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये । आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।
नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम । नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।
जनकपुर में शिव धनुष तोड़ने के उपरांत राम जी ने अपना विराट रूप परशुराम जी को दिखाया था ।
भगवान श्रीराम ने अपने विराट रूप को दिखाने के लिए परशुराम जी को दिव्य नेत्र प्रदान किया था ।।
।। जय श्रीराम ।।
इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी दें
No comments:
Post a Comment
इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी दें