जो राम रँगीले हैं अर्थात जो लोग राम जी के रंग में रँगे हुए हैं उनका तीनों कालों में अर्थात, भूत, वर्तमान और बविश्य में भला ही होता है । इसलिए हम सबको भी राम जी के रंग में रँग जाना चाहिए ।
समस्या तो तब आती है जब रँगे तो संसार के रंग में होते हैं और दिखाया जाता है कि हम राम के रंग में रँगे हुए हैं । अथवा आधा-अधूरा या केवल कुछ अंश में ही रँगे होते हैं । चलो हम लोग रामजी से और हनुमानजी से प्रार्थना करें कि हमारा मन भी रामजी के रंग में रँग जाए-
रंगों रे मन ! राम रघुवर के रंग ।
जग से नेह लगावत मूरख, कछु नहिं जावत संग ।।१।।
सुख जल खोजत कतहुँ न पावत, दौड़त सरिस कुरंग ।
दिन-दिन घटत आयू बल तन को, जोहत काल भुजंग ।।२।।
मनुज शरीर लहे का पामर, जो नहिं बदले ढ़ंग ।
राम भजे अरु राम गुन गाए, परिहरि कुमति कुसंग ।।३।।
साधु संत रघुनाथ कथा बिनु, बाढ़त तृष्ना तरंग ।
जनम जनम की काई भीतर, धुलत धुलै सत्संग ।।४।।
सुंदर श्याम सुशील सियावर, लाजत देखि अनंग ।
कर सर चाप धरे रघुनंदन, काँधे लसत निषंग ।।५।।
सुमिरत राम सखा करि राखत, प्रीति करत नहिं भंग ।
दीन संतोष दीन जन राखत, बानर-भालु भी संग ।।६।।
।। जय श्रीसीताराम ।।
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