प्रत्येक मनुष्य के शरीर की लम्बाई चाहे वह छोटे कद का अथवा बड़े कद का हो, बच्चा हो या युवा उसके हाथ के अँगुल की माप से चौरासी अँगुल ही होती है क्योंकि वह चार प्रकार और चौरासी लाख योनियों में जन्मता और मरता रहता है-
आकर चारि लाख चौरासी।
योनि भ्रमत यह जिव अविनासी ।।
उपरोक्त माप में किसी भी हाथ की चार अँगुलियों को एक साथ रखते हुए माप लिया जाता है। हाथ की कोहनी से मध्यमा अगुँली तक की माप को एक हाथ की माप कहा जाता है। प्रत्येक मनुष्य के शरीर की लम्बाई उसके हाथ की माप से साढ़े तीन हाथ ही होती है। एक हाथ की माप मे केवल चौबीस अँगुल होता है। इस प्रकार साढ़े तीन हाथ चौरासी अँगुल के बराबर होता है।
।। जय श्रीराम ।।
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