नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।
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Tuesday, February 10, 2026

जे राम-रँगीले

 

जो राम रँगीले हैं अर्थात  जो लोग राम जी के रंग में रँगे हुए हैं उनका तीनों कालों में अर्थात, भूत, वर्तमान और भविश्य में भला ही होता है । इसलिए हम सबको भी राम जी के रंग में रँग जाना चाहिए 

   समस्या तो तब आती है जब रँगे तो संसार के रंग में होते हैं और दिखाया जाता है कि हम राम के रंग में रँगे हुए हैं । अथवा आधा-अधूरा या केवल कुछ अंश में ही रँगे होते हैं । चलो हम लोग रामजी से और हनुमानजी से प्रार्थना करें कि हमारा मन भी रामजी के रंग में रँग जाए-


रंगों रे मन ! राम रघुवर के रंग ।

जग से नेह लगावत मूरख, कछु नहिं जावत संग ।।१।।

सुख जल खोजत कतहुँ न पावत, दौड़त सरिस कुरंग ।

दिन-दिन घटत आयू बल तन को, जोहत काल भुजंग ।।२।।

मनुज शरीर लहे का पामर, जो नहिं बदले ढ़ंग ।

राम भजे अरु राम गुन गाए, परिहरि कुमति कुसंग ।।३।।

साधु संत रघुनाथ कथा बिनु, बाढ़त तृष्ना तरंग ।

जनम जनम की काई भीतर, धुलत धुलै सत्संग ।।४।।

सुंदर श्याम सुशील सियावर, लाजत देखि अनंग ।

कर सर चाप धरे रघुनंदन, काँधे लसत निषंग ।।५।।

सुमिरत राम सखा करि राखत, प्रीति करत नहिं भंग ।

दीन संतोष दीन जन राखत, बानर-भालु भी संग ।।६।।

 

          ।। जय श्रीसीताराम ।।

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