नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Thursday, July 2, 2020

सनातन धर्म के प्रत्यक्ष देवता- सूर्य नारायण


सनातन धर्म के सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं । इन्हें सूर्य नारायण भी कहा जाता है । इनकी बड़ी महिमा है । वेद-पुराण, रामायण, महाभारत, श्रीरामचरितमानस आदि में सूर्य देव का वर्णन है । ग्रंथों में इनकी महिमा मुक्तकंठ से गाई गई है ।

 

   सनातन धर्म के पंच देवताओं में से सूर्य देव भी एक देवता हैं । सनातन धर्म में सूर्योपासना का महत्वपूर्ण स्थान है । सूर्य देव को प्रातःकाल जल अर्पण किया जाता है और इसका अनुपम लाभ भी होता है ।

 

   सूर्य देव प्रत्येक प्राणी, वनस्पति आदि के लिए जीवनदाई हैं । सूर्य के बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है । कोई भी व्यक्ति वो चाहे जिस देश अथवा धर्म का हो सूर्य देव सबको प्रकाश देते हैं । बिना भेदभाव के सबका कल्याण करते हैं । सूर्य देव सनातन हैं । आदि काल से हैं । और सनातन धर्म के पूजनीय देवता है ।

 

  सामान्यतयाः बोलचाल की भाषा में हम लोग कहते हैं कि सूर्य का उदय पूरब दिशा में होता है । और सूर्य पश्चिम दिशा में अस्त होता है । लेकिन सनातन धर्म के अनुसार सूर्य का न उदय होता है और न अस्त । अर्थात सूर्य देव हमेशा उदित ही रहते हैं । इस तथ्य का वर्णन पुराणों में मिलता है ।


 सूर्यदेव की निम्नलिखित स्तुति बड़ी ही सुंदर है और यह श्रीविनयपत्रिका जी से ली गई है । इसमें सूर्य देवता की महिमा का वर्णन है-

 

दीनदयाल दिवाकर देवा । कर मुनि मनुज सुरासुर सेवा ।।

हिम तम कर केहरि करमाली । दहन दोष दुख दुरित रुजाली ।।

कोक कोकनद लोक प्रकाशी । तेज प्रताप रूप रस राशी ।।

सारथि पंगु दिव्य रथ गामी । हरि शंकर बिधि मूरति स्वामी ।।

वेद पुराण प्रगट जश जागे । तुलसी राम भगति वर माँगे ।।

 

 सूर्य नारायण में व्रह्माजी, विष्णुजी और शंकरजी सबके दर्शन होते हैं । अर्थात सूर्य नारायण व्रह्माजी, विष्णुजी और शंकरजी मय हैं ।

 

  इसी तरह ग्रंथों में कहा गया कि सूर्य मंडल में भगवान श्रीसीताराम स्थित हैं । इसका वर्णन सनत्कुमारसंहिता आदि ग्रंथों में मिलता है ।

 

  कुलमिलाकर सूर्य देवता सनातन धर्म के पूजनीय देवता हैं । और पत्येक सनातन धर्मी को सूर्य पूजन करनी चाहिए । श्रीवाल्मीकि रामायण में आदित्य  ह्रदय स्तोत्र का वर्णन है जिसके पाठ से सूर्य देव की प्रसन्नता, निरोगता और शत्रु पर विजय आदि प्राप्त होती है ।

 


।। जय श्रीसूर्य नारायण ।।


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