नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Wednesday, September 7, 2022

कृष्ण रूप प्रगटे रघुराई

कृष्ण रूप प्रगटे रघुराई ।

दशरथ कौशल्या मन भावन बालकेलि सुख पाई ।।१।।

वीरसेन रत्नालका देवी सोइ सुख हित मन लाई ।

भगति प्रेम सेवा तप कीन्हें दम्पति अति हर्षाई ।।२।।

परमोदार राम प्रभु प्रगटे बोले गिरा सुहाई ।

द्वापर नन्द यशोदा बनिहौ गोकुल गाँव रहाई ।।३।।

तब शिशु रूप प्रगट होइ रहिहौं माता-पिता बनाई ।

ग्यारह बरष बाल सुख दैहों बसौ अमरपुर जाई ।।४।।

धरा द्रोण बसु बने अमरपुर पुनि जन्में जब आई ।

रघुवर कृष्ण रूप तब जनमें घर-घर मोद बधाई ।।५।।

दीन संतोष देवकीनन्दन गए यहि रूप समाई ।

कृष्णचंद्र निज जन मन राखे चरित किए सुखदाई ।।६।।


।। श्रीकृष्णचंद्र भगवान की जय ।। 

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