नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Friday, January 9, 2026

हनुमान सम नहिं बड़भागी | नहिं कोउ राम चरन अनुरागी

 

भगवान शंकरजी पार्वतीजी से कहते हैं कि हनुमानजी के समान बड़ा भाग्यशाली दूसरा कोई नहीं है  और न ही कोई हनुमानजी के समान राम जी के चरणों में प्रेम करने वाला है ।

 

  हे गिरिजा ! जिनकी अर्थात हनुमानजी की  प्रीति और सेवा का वर्णन बार-बार स्वयं प्रभु राम ने किया है । उनके समान दूसरा कौन होगा ?

 

  इस प्रकार बड़ा भाग्यशाली होने में और राम चरण अनुरागी होने में हनुमानजी महाराज अद्वितीय है ।

 

  ।। जय श्रीहनुमानजी ।।

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