लोक एक ही है, भगवान एक ही हैं । लेकिन भाव और भावना के अनुसार वही लोक किसी को साकेत दिखता है, किसी को वैकुण्ठ दिखता है और किसी को गोलोक दिखता है-
जाकी रही भावना जैसी । प्रभु मूरति देखी तिन तैसी ।।
।। जय श्रीराम ।।
जो सदा अर्थात तीनों कालों में और सर्वत्र सत्य रहता है । वह ही शाश्वत कहलाता है । वही सनातन कहलाता है । और सनातन धर्म के अनुसार परमात्मा सत्य, शास्वत और सनातन है ।
नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये । आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।
नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम । नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।
लोक एक ही है, भगवान एक ही हैं । लेकिन भाव और भावना के अनुसार वही लोक किसी को साकेत दिखता है, किसी को वैकुण्ठ दिखता है और किसी को गोलोक दिखता है-
जाकी रही भावना जैसी । प्रभु मूरति देखी तिन तैसी ।।
।। जय श्रीराम ।।