नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।
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Tuesday, December 30, 2025

भगवान और उनका लोक

 लोक एक ही है, भगवान एक ही हैं । लेकिन भाव और भावना के अनुसार वही लोक किसी को साकेत दिखता है, किसी को वैकुण्ठ दिखता है और किसी को गोलोक दिखता है-

 

जाकी रही भावना जैसी । प्रभु मूरति देखी तिन तैसी ।।

 

।। जय श्रीराम ।।

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