नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।

Monday, September 14, 2026

हमार सुधि लीजै खरारी

 दीनन के दुख हारी, हमार सुधि लीजै खरारी ।

साधु संत सदग्रंथ बतावत, दीन मलीन राम को भावत ।

डूबत लेहिं उबारी । हमार सुधि. ।।

दीन मलीन को राम बसावत, बिगड़ी जनम की नाथ बनावत । सुर मुनि कहत पुकारी । हमार सुधि. ।।

नीच निषाद को कंठ लगाए, केवट से पद कंज धुलाए ।

शवरी अहिल्या तारी । हमार सुधि. ।।

कोल किरात भील अपनाए, वानर भालू सखा बनाए ।

गीध को दिहेउ उधारी । हमार सुधि. ।।

जो जन और ठौर नहिं पाए, आए सुनि गुन विरद बुलाए । राखेउ सब दुख टारी । हमार सुधि. ।।

दीन संतोष नहीं मुख मोरेउ, दीन मलीन ओर निज हेरेउ ।  रघुवर विरद संभारी । हमार सुधि. ।।

 

।। खरारी भगवान श्रीराम की जय ।।

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