रामजी
के प्रति कोई अपकार कर दे तो राम जी उसे याद नहीं रखते । भूल जाते हैं । लेकिन कोई थोड़ा भी उपकार कर दे तो उसे कभी नहीं भूलते । उपकार को याद रखते हैं । कोई रामजी से शत्रुता करे तो रामजी उसके किए को भी याद नहीं रखते ।
क्योंकि रामजी को इन सब चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता । लेकिन उपकार से फर्क पड़ता है-
सुनु कपि तुम समान उपकारी ।
नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी ।।
प्रति उपकार करौं का तोरा ।
सनमुख होइ न सकत मन मोरा ।।
सुनु सुत तोहि उरिन मैं नहीं ।
देखेउँ करि बिचार मन माहीं ।।
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