नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये । आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम । नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।
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Sunday, September 25, 2022

गहो रे मन सीताराम के चरण

 ।। श्रीसीतारामाभ्याम नमः ।।


गहो रे मन सीताराम के चरण ।

सुंदर स्याम चिन्ह कुलिसादिक, जन दुख दोष हरण ।।१।।

छियांनबे चिन्ह मनोहर सोहैं, पद तल अरुण बरण ।

मंगलमूल पवनसुत सेवित, गुनगन अमित धरण ।।२।।

सुर मुनि साधु चहत पद पंकज, कल्मष कोटि दरण ।

सबबिधि लायक जनसुखदायक, तारण और तरण ।।३।।

अगजग जीवन मूरि सजीवन, संसृत रोग हरण ।

हरि हर बिधि को भाग्य बिधाता, कारण और करण ।।४।।

दीन मलीन ठौर को दायक, पोषण और भरण ।

दीन संतोष असरण जग जेते, तिनको एक सरण ।।५।।

 

।। श्रीसीताराम भगवान की जय ।।

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