नमस्तुभ्यं भगवते विशुद्धज्ञानमूर्तये आत्मारामाय रामाय सीतारामाय वेधसे ।।


नमस्ते राम राजेन्द्र नमः सीतामनोरम नमस्ते चंडकोदण्ड नमस्ते भक्तवत्सल ।।


दीन मलीन हीन जग मोते । रामचंद्र बल जीवत तेते ।।
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Sunday, March 5, 2023

कलियुग में मतिमंद बढ़ जाते हैं-उभय भेद भाखत मतिमंदा

इस लेख का आधार ग्रंथ ‘राम रहस्य’ नामक ग्रंथ है । ग्रंथों के अनुसार मतिमंद की कई परिभाषा है । और कोई एक परिभाषा लागू होते ही व्यक्ति मतिमंद की श्रेणी में आ जाता है ।

 

 ग्रंथों के अनुसार जो मनुष्य शरीर पाकर केवल विषयों में लगा रहता है वह मतिमंद है । जिसे भगवान और भगवान की कथा प्रिय नहीं है वह मतिमंद है । भगवान की निंदा करने वाले मतिमंद हैं  इत्यादि ।

 

  साधारण आदमी से लेकर कई साधु-संत वेषधारी लोग भी मतिमंद होते हैं । आजकल कई मतिमंद लोग कथा-प्रवचन भी करते हैं । राम रहस्य नामक ग्रंथ में कहा गया है कि रघुकुल नंदन श्रीरामजी ही नंद नंदन श्रीकृष्ण जी हैं । और जो लोग दोनों में भेद बताते हैं, मानते हैं वे मतिमंद हैं ।

 

   कई साधु-संत वेष धारी लोग, कई कथा-प्रवचन कहने वाले लोग कह देते हैं कि रामजी कम कला के और कृष्ण जी अधिक कला के हैं । कई लोग कहते हैं कि पूर्णता कृष्ण जी और कृष्ण नाम में ही मिलती है । इस प्रकार ऐसे लोग रामजी में और कृष्ण जी में भेद मानते हैं, बताते हैं । ये सबके सब लोग राम रहस्य के अनुसार मतिमंद हैं -

 

जो रघुनंद सोई नंदनंदा । उभय भेद भाखत मतिमंदा ।।

रघुपति कृष्ण, कृष्ण रघुवीरा । उभय भजन भंजन भवभीरा ।।

                                 -राम रहस्य 

 

 

।। जय श्रीराम ।।

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